Monday, November 29, 2010

pukaar

कश्मीर की वादियों में एक छोटा सा जहाँ बनाया था मैंने ,
उस घर को प्यार और अपनेपन से सजाया था मैंने .
हर तरफ खूबसूरती का आभास  था वहां,
खुशबू में भी ज़िन्दगी का एहसास था वहां .
बच्चे मुस्कुराते हुए घर आते थे वहां ,
अपनी ढेर सारी  बातें सुनाके जाते थे वहां .
ज़िन्दगी के हसीं सपने जिए जा रही थी मैं ,
एक - एक पल ख़ुशी से बिठाये जा रही थी मैं .
चारो तरफ पानी की लेहेरें बात करती थी मुझ से ,
आती जाती लुका छुपी खेलती थी मुझ से .
फूलों में नए रंग भरे थे उस दिन ,
वह भी मुस्कुराने लगे थे उस दिन.
बादलों से घिरा हुआ यह शहर था मेरा ,
ज़िन्दगी को रोशन किये हुए जहाँ था मेरा.
सब तरफ सुकून था यहाँ,
सब तरफ अमन था यहाँ .
हर दिन एक नया सवेरा था , हर शाम एक अनकही दास्ताँ थी यहाँ .
एक खुशबू महेकती थी हवा में ,
एक प्यार का एहसास था सबके दिलों में .
फिर एक रात ------
जाने क्यूँ फूलों  से मुस्कराहट चली गयी ,
जाने क्यूँ मेरी ज़िन्दगी आंसुओं से भर गयी .
जाने क्यूँ वह लोग आये और तबाह कर गए ,
जाने क्यूँ पंछी अपने जहाँ से उड़  गए .
 ना जाने कहाँ वह अमन गुमनाम हो गया ,
ना जाने कहाँ वह प्यार खो गया .
एक रात में यह शहर राख में बदल गया ,
एक रात में सब कुछ उजर गया .
जाने किस बात की सजा हमें मिली ,
जाने किन गलतियों ने हमारी ज़िन्दगी ले ली .
काला कपडा दाल कर आये थे वह लोग ,
काली कर गए मेरी  रातें - मेरा दिन वह लोग .

आज भी यह सवाल पूछने के लिए भटक रही हूँ मैं ,
आज भी मेरा कसूर जान ने के लिए तड़प रही हूँ मैं.
क्या जवाब दे सकोगे तुम मेरी इस हालत का,
क्या खुश रह सकोगे तुम मेरा सब कुछ ले कर .
मिति में मिलना है सबको एक दिन,
यह दुनिया छोड़ के जाना है सबको एक दिन .
तब क्या इस ज़मीन के टुकड़े को अपने साथ ले जा पाओगे  ,
तब क्या उन  मासूम बच्चों की जान वापस दे पाओगे  .

इस दुनिया में राज़ करने वाला कोई और है ,
इस  को चलाने वाला कोई और है ,

भूल गए तुम
भूल गए तुम .......

तुम्हारी आत्मा

2 comments:

  1. nice 1.... a very sensitive topic :)

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  2. Awesome Patriotism Thought dear... har shaqs ko yeh padhna chahiye.. Keep up the good work sweety....

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