आज भी सड़क के उस पार देखती हूँ मैं ..
आज भी गली के उस ऒर झांकती हूँ मैं।।
जहाँ खुशियाँ बस्ती थी मेरी
जहाँ ज़िन्दगी चलती थी मेरी।।
इस पार भी मेरा ही जहां है
उस पार भी मेरा ही आसमान था
पर क्यूँ आखिर क्यूँ इस पार से
उस पार जाने को आज भी तड़पती हूँ मैं।।
एक बार फिर उस नीले आकाश में उड़ने को तरसती हूँ मैं।।
इस पार भी लोग हैं।
उस पार भी मेरे अपने थे।।
पर क्यूँ आखिर क्यूँ इस पार
कुछ खो सा गया है .. जिसे हर तरफ धुन्धती फिरती हूँ मैं।।
इस भीड़ में भी एक गुमनाम सी बनी घुमती हूँ मैं।।
इस पार भी धुप चमकती है
उस पार भी रौशनी होती थी।।
पर क्यूँ आखिर क्यूँ इस पार
अपना साया नही देख पाती हूँ मैं।।
अपने अक्स को खोते हुए चलती हूँ मैं।।
इस पार भी दिल धडकता है मेरा।।
उस पार भी दिल आहें भरता था।।
पर क्यूँ आखिर क्यूँ इस पार
अपने जीने की वजह खोज रही हूँ मैं।।
एक रात के ख़तम होने का इंतज़ार कर रही हूँ मैं।।
(एक लड़की की कहानी उसी की जुबानी , जो एक चमचमाती रौशनी लिए हुए सड़क के दोनों किनारों का फरक समझ रही है और उसी में अपनी पहचान धुंध रही है )
आज भी गली के उस ऒर झांकती हूँ मैं।।जहाँ खुशियाँ बस्ती थी मेरी
जहाँ ज़िन्दगी चलती थी मेरी।।
इस पार भी मेरा ही जहां है
उस पार भी मेरा ही आसमान था
पर क्यूँ आखिर क्यूँ इस पार से
उस पार जाने को आज भी तड़पती हूँ मैं।।
एक बार फिर उस नीले आकाश में उड़ने को तरसती हूँ मैं।।
इस पार भी लोग हैं।
उस पार भी मेरे अपने थे।।
पर क्यूँ आखिर क्यूँ इस पार
कुछ खो सा गया है .. जिसे हर तरफ धुन्धती फिरती हूँ मैं।।
इस भीड़ में भी एक गुमनाम सी बनी घुमती हूँ मैं।।
इस पार भी धुप चमकती है
उस पार भी रौशनी होती थी।।
पर क्यूँ आखिर क्यूँ इस पार
अपना साया नही देख पाती हूँ मैं।।
अपने अक्स को खोते हुए चलती हूँ मैं।।
इस पार भी दिल धडकता है मेरा।।
उस पार भी दिल आहें भरता था।।
पर क्यूँ आखिर क्यूँ इस पार
अपने जीने की वजह खोज रही हूँ मैं।।
एक रात के ख़तम होने का इंतज़ार कर रही हूँ मैं।।
(एक लड़की की कहानी उसी की जुबानी , जो एक चमचमाती रौशनी लिए हुए सड़क के दोनों किनारों का फरक समझ रही है और उसी में अपनी पहचान धुंध रही है )