Thursday, April 26, 2012

Zindagi..

गाड़ियों के शोरगुल में ख़ामोशी कहीं खो सी गयी है 
भागती हुई दुनिया  में ज़िन्दगी कहीं खो सी गयी है 

चिंताओं से घिरा है आजकल हर इंसान ,
फुर्सत के पलों में भी  माथे पे सिलवटें हैं तान .

छोटी सी उम्र है सबकी ..सब अपने भविष्य से हैं अनजाने..
देर ना लग जाए समझने में इस ज़िन्दगी के हसीं अफ़साने ..

दौड़ते हुए  यह लम्हे , अपना ठहराव खोने लगे हैं..
ख्वाब पुरे करने में लगे हुए , अपने रंग छोड़ने लगे हैं..

ज़िन्दगी की उलझनों में डूबा हुआ .. हर आदमी है आजकल..
ठंडी हवाओं में भी.. एक तपन का एहसास लिए हुए चल रहा है आजकल..

भूल रहा है वोह  ज़िन्दगी के  असली मायने..
वोह प्यार के फ़साने.. , वोह गीत पुराने..

खुदी  से खफा है , खुद से परेशान 
खुद हो चुका है  खुदी  से अनजान..

भीड़ का हिसा बना हुआ .. राहों को मंजिलें  समझता हुआ चले जा रहा है..
एक इमारत के ऊपर दूसरी इमारत खड़े किये जा रहा है..

रिश्तों में भी मतलब निकालने लगा है..
अपने ही खून को पराया मान ने लगा है..

रास्तों  पे चलते हैं अगर आप .. एक पत्थर से पत्थर ना बन जाइए..
आते हुए फूलों को चुन ने के लिए .. एक प्रयास तो  कर जाइए.. 

एक पल की दुरी का हिसाब नही लगा सकते आप..
उस माँ के टूटते दिल को संभाल नही सकते आप..

ख़ुशी मिलेगी आपको .. ख़ुशी बांटे हुए चलिए..
यह एक ज़िन्दगी है.. इसे जिंदगानी  बनाते हुए चलिए..







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