Thursday, December 29, 2011

Sirf Meri !!

जिंदा हैं हम सिर्फ उनके दीदार के लिए
और एक वोह हैं जो परदे में रहना पसंद करते हैं...

हम वोह हैं जो उनकी एक हसी पे यह सारा जहां न्योछावर कर दें
और एक वोह हैं जो अपनी एक झलक के लिए हमें  तडपाते हैं ...

क्या रहा है हमारे पास जिसके लिए कुर्बान हो जाएँ
बस वोही तो थी जो हर पल हमारी जान ले जाती थी...

उनसे नज़रें हटाऊ तो गुमसुम हो जाता हूँ आज भी मैं
और एक वोह हैं जो अब किसी और की आँखों के नूर सी सजी हुई दिखती हैं...

क्या तारीफ करूँ उनके हुस्न की ..आज भी अलफ़ाज़ कम पड़ जाते हैं..
मोतियों से शब्द चाल बदल जाते हैं...

समझ नही आता .. वक़्त की मजबूरियों से सीखे या हमारी गलतियों से ..
की आज भी ....  हम उनकी राह के पत्थर साफ़ किये जा रहे हैं..

अब तो चार कदम बढाने की हिम्मत भी नही होती.
बस एक दर्द का एहसास सोचकर ... उनके सपने उतारे जा रहे  हैं...

अब तो उस पल का इंतज़ार है हमें जब सांस भले ही ना होगी पर तुम होगी मेरे करीब ,
जब आंसू भले ही नही आयें..पर तुम आओगी मेरी आँखें पोछने..

जब मिलेंगे हम  उन चाँद सितारों के बीच और यह ज़माने की भीड़ ना होगी..
जब खिलेंगे फूल और मुस्काएगी ज़िन्दगी और यह ग़मों की बरसात ना होगी...

मिलेंगे एक दिन .. यह वादा है तुमसे मेरा..
और उस दिन तुम मेरी होगी.. सिर्फ मेरी... !!!


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